देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
अजनबी नज़रों से | ग़ज़ल
अजनबी नज़रों से अपने आप को देखा न कर
आइनों का दोष क्या है? आइने तोड़ा न कर
यह भी मुमकिन है ये बौनों का नगर हो इसलिए
छोटे दरवाज़ों की ख़ातिर अपना क़द छोटा न कर
यह सनक तुझको भी पत्थर ही न कर डाले कहीं
हर किसी पत्थर को पारस जानकर परखा न कर
रात भी गुज़रेगी, कल सूरज भी निकलेगा ज़रूर
ये अंधेरे चन्द लमहों के हैं, जी छोटा न कर
काँच सारी खिड़कियों के धूप ने चटका दिए
वक़्त की चेतावनी को और अनदेखा न कर
- राजगोपाल सिंह
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