समस्त आर्यावर्त या ठेठ हिंदुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिंदी या हिंदुस्तानी है। -सर जार्ज ग्रियर्सन।

मौज-मस्ती के पल भी आएंगे | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
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मौज-मस्ती के पल भी आएंगे - राजगोपाल सिंह की ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Rajgopal Singh

मौज-मस्ती के पल भी आएंगे
पेड़ होंगे तो फल भी आएंगे

आज की रात मुझको जी ले तू
चांद-तारे तो कल भी आएंगे

चाहतें दोस्ती की पैदा कर
रास्ते तो निकल भी आएंगे

आइने लाए जाएंगे जब तक
लोग चेहरे बदल भी आएंगे

अजनबी बादलों से क्या उम्मीद
आए तो ले के जल भी आएंगे

- राजगोपाल सिंह

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