देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

ऐसे कुछ और सवालों को | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
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ऐसे कुछ और सवालों को - राजगोपाल सिंह की ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Rajgopal Singh

ऐसे कुछ और सवालों को उछाला जाये
किस तरह शूल को शूलों से निकाला जाये

फिर चिराग़ों को सलीक़े से जलाना होगा
तम है जिस छोर, उसी ओर उजाला जाये

ये ज़रूरी है कि ख़यालों पे जमी काई हटे
फिर से तहज़ीब के दरिया को खँगाला जाये

 फावड़े और कुदालें भी तो ढल सकती हैं
अब न इस्पात से ख़ंज़र कोई ढाला जाये

-राजगोपाल सिंह

 

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