देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

धरती मैया | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
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धरती मैया जैसी माँ
सच पुरवैया जैसी माँ
 
पापा चरखी की डोरी
इक कनकैया जैसी माँ

तूफ़ानों में लगती है
सबको नैया जैसी माँ

बाज़ सरीखे सब नाते
इक गौरैया जैसी माँ

-राजगोपाल सिंह

 

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