अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

अचूक जवाब

रचनाकार: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
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अचूक जवाब | हास्य-व्यंग्य कथा

एक अमीर से किसी फकीर ने पैसा मांगा। उस अमीर ने फकीर से कहा, "तुम पैसों के बदले लोगों से लियाकत चाहते तो कैसे लायक आदमी हो गये होते।"

फकीर चटपट बोला, "मैं जिसके पास जो कुछ देखता हूँ, वही उससे मांगता हूँ।"

- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

 

 

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