अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

परिहासिनी

परिहासिनी : लघु हास्य-व्यंग्य | Parihasini by Bhartendu Harishchandra

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की लघु हास्य-व्यंग्य से भरपूर - परिहासिनी।

 

खुशामद

एक नामुराद आशिक से किसी ने पूछा, "कहो जी, तुम्हारी माशूका तुम्हें क्यों नहीं मिली?"

बेचारा उदास होकर बोला, "यार, कुछ न पूछो, मैंने इतनी खुशामद की कि उसने अपने को सचमुच परी समझ लिया और हम आदमजाद से बोलने में भी परहेज किया।"

- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

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