पराधीनता की विजय से स्वाधीनता की पराजय सहस्त्र गुना अच्छी है। - अज्ञात।

ऐसे कुछ और सवालों को | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
★★★★★
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

ऐसे कुछ और सवालों को - राजगोपाल सिंह की ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Rajgopal Singh

ऐसे कुछ और सवालों को उछाला जाये
किस तरह शूल को शूलों से निकाला जाये

फिर चिराग़ों को सलीक़े से जलाना होगा
तम है जिस छोर, उसी ओर उजाला जाये

ये ज़रूरी है कि ख़यालों पे जमी काई हटे
फिर से तहज़ीब के दरिया को खँगाला जाये

 फावड़े और कुदालें भी तो ढल सकती हैं
अब न इस्पात से ख़ंज़र कोई ढाला जाये

-राजगोपाल सिंह

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।