देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
सामने गुलशन नज़र आया | ग़ज़ल
सामने गुलशन नज़र आया
गीत भँवरे ने मधुर गाया ।
फूल के संग मिले काँटे भी
ज़िन्दगी का यही सरमाया ।
उन की महफ़िल में क़दम मेरा
मैं बडी गुस्ताखी कर आया ।
आँख में भर कर उसे देखा
फिर रहा हूँ तब से भरमाया ।
चोट ऐसी वक्त ने मारी
गीत होंठों ने मधुर गाया ।
धुंध ऐसी सुबह को छाई
शाम का मन्जर नज़र आया ।
आँख टेढ़ी जब हुई उन की
ज़िन्दगी ने बस क़हर ढाया ।
- सुधेश
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