देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
मैंने लिखा कुछ भी नहीं | ग़ज़ल
मैंने लिखा कुछ भी नहीं
तुम ने पढ़ा कुछ भी नहीं ।
जो भी लिखा दिल से लिखा
इस के सिवा कुछ भी नहीं ।
मुझ से ज़माना है ख़फ़ा
मेरी ख़ता कुछ भी नहीं ।
तुम तो खुदा के बन्दे हो
मेरा खुदा कुछ भी नहीं ।
मैं ने उस पर जान दी
उस को वफ़ा कुछ भी नहीं ।
चाहा तुम्हें यह अब कहूँ
लेकिन कहा कुछ भी नहीं ।
यह तो नज़र की बात है
अच्छा बुरा कुछ भी नहीं ।
- सुधेश
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