देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

खोजिए

रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी' (न्यूज़ीलैंड)
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

भीड़ है
शब्द हैं,
नगाड़े हैं।
लेकिन, गुम है--
इंसान, ओज और ताल।

खोजिए, मिल जाएं शायद--
भीड़ में इंसान
शब्दों में ओज
और
नगाड़ों में ताल। 

-रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।