देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
विचित्र विवशता!
‘उधर प्रशासन को
चुस्त बनाने के
अथक प्रयास हो रहे हैं
और इधर आप
टेबल पर सिर रखकर
आराम से सो रहे हैं!'
उत्तर मिला--
‘अब आप ही बताएं!
ऑफिस में ‘तकिया'
कहां से लाएं?'
-मधुप पांडेय
[श्रेष्ठ हास्य व्यंग्य कविताएं, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली]
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