मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।
तेरा हाल मुझसे
तेरा हाल मुझसे जो पूछा किसी ने
न मैं बोल पाया ना तू अब रही है
न घर-घर लगे है ना दिल ही थमे है
कि जिस रोज से माँ मेरी चल बसी है
अभी आ रही हैं तुम्हारी सदाएं
यहीं पर कहीं पर तू जैसे खड़ी है
न उसने बुलाया ना आवाज़ ही दी
पता तब चला घर में माँ ना रही है
-रोहित कुमार 'हैप्पी'
[माँ को सादर समर्पित]
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