देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

तीन हाइकु

कोरोना भी है
रोटी के लिए कुछ
करना भी है।

जोहते बाट
बारी-बारी पहुँचे
श्मसान घाट।

सर्व सम्पन्न
धन-साधन-अन्न
मन विपन्न

-पवन कुमार जैन

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।