देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
साँप | अज्ञेय की प्रसिद्ध लघु कविता
साँप!
तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना--
विष कहाँ पाया?
साँप!
तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना--
विष कहाँ पाया?
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