देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
नया ‘वाद’
एक साहित्य गोष्ठी में
जितने थे
सब किसी न किसी ‘वाद' के
वादी ‘थे'।
गोष्टी खत्म हुई
तो एक ने पूछा,
"जो सबसे ज्यादा बोले
वह कौन थे?"
दूसरे ने धीरे से कहा,
वह इलाहावादी थे !"
- निशिकांत
[गुदगुदी]
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