देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
ढोल, गंवार...
मैंने अपनी पत्नी से कहा --
"संत महात्मा कह गए हैं--
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी
ये सब ताड़न के अधिकारी!"
[इन सभी को पीटना चाहिए!]
इसका अर्थ समझती हो या समझाएं?
पत्नी बोली-
"हे स्वामी, इसका मतलब तो बिलकुल साफ़ है
इसमें एक जगह मैं हूँ और चार जगह आप हैं।"
- सुरेंद्र शर्मा
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