देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
मुकरी
पडी थी मैं अचानक चढ आयो।
जब उतरयो पसीनो आयो।।
सहम गई नहिं सकी पुकार।
ऐ सखि साजन ना सखि बुखार।।
राह चलत मोरा अंचरा गहे।
मेरी सुने न अपनी कहे
ना कुछ मोसे झगडा-टंटा
ऐ सखि साजन ना सखि कांटा
-अमीर ख़ुसरो
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