देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

दो क्षणिकाएँ

कहा-सुनी

तुमने कहा, हमने सुना। 
हमने कहा, तुमने सुना। 
बस बात वहीं ख़त्म हो गई।


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सफ़ाई

तुमने कहा, 
अपनी सफ़ाई में कुछ कहना है?
हमने सुना, 
उस पर विचार किया।
फिर जवाब दिया-- 
जब सफ़ाई देने की ही नौबत आ गई 
तो फिर,
कहने को रह ही क्या गया?

डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड 
न्यूज़ीलैंड

 

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