हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

कौन

अगर न होता चाँद, रात में
हमको दिशा दिखाता कौन?
अगर न होता सूरज, दिन को
सोने-सा चमकाता कौन?
अगर न होतीं निर्मल नदियाँ
जग की प्यास बुझाता कौन?
अगर ना होते पर्वत, मीठे
झरने भला बहाता कौन?
अगर न होते पेड़ भला फिर
हरियाली फैलाता कौन?
अगर न होते फूल बताओ
खिल-खिलकर मुसकाता कौन?
अगर न होते बादल, नभ में
इंद्रधनुष रच पाता कौन?
अगर न होते हम तो बोलो
ये सब प्रश्न उठाता कौन?

- बालस्वरूप राही

 

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