हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। - वी. कृष्णस्वामी अय्यर

चिड़िया का गीत

सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी बस
इतना-साही है संसार।
फिर मेरा घर बना घोंसला
सूखे तिनकों से तैयार
तब मैं यही समझती थी बस
इतना-सा ही है संसार।

फिर मैं निकल गई शाखों पर
हरी-भरी थीं जो सुकुमार
तब मैं यही समझती थी बस
इतना-सा ही है संसार।

आखिर जब मैं आसमान में
उड़ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार।

- निरंकार देव 'सेवक'

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 1

अनुराग प्रकाश यादव anurag77prakash@gmail.com
16-Jun-2026 05:37
बचपन में पढ़ी कविता आज अचानक याद आ गई, सर्च करने पर मिल गयी, बहुत अच्छा लगा

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