भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

गोरख पांडे की दो कविताएं

उनका डर

वे डरते हैं

किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत

गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं

कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग

उनसे डरना बंद कर देंगे।

-गोरख पांडेय


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सच्चाई

मेहनत से मिलती है
छिपाई जाती है स्वार्थ से
फिर, मेहनत से मिलती है

-गोरख पांडे

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