भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।

अश्कों ने जो पाया है

अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है कि जमाने को गिला है

जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो साज़ पे गुज़री है वो किस दिल को पता है

हम फूल हैं औरों के लिए लाए हैं ख़ुशबू
अपने लिए ले दे के इक दाग मिला है

-साहिर लुधियानवी

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