हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

आप हँसते जाइए | हास्य-कविता

आप हँसते जाइए हमको हँसाते जाइए
चमचमाते दांत मोती से दिखाते जाइए
 
भरके रक्खी मेज पर 'ख्याली पुलाओ' की पलेट
आप भी उस में से चम्मच इक उठाते जाइए
 
कुछ उड़ाते गप्प हैं और कुछ उड़ाते हैं पतंग
आप 'हाथों के मगर तोते उड़ाते जाइए 
 
चाहिए कब शेखचिल्ली को किराए का मकान,
बस 'हवा में एक किला-सा बनाते जाइए 
 
सात नम्बर डेड़-सौ में से मिले भूगोल में
एक जीरो सात के आगे लगाते जाइए 
 
-बी० आर० नागर

 

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