साँप | अज्ञेय की प्रसिद्ध लघु कविता

रचनाकार: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

साँप!

तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।

एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना--
विष कहाँ पाया?

- अज्ञेय