हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

दो अक्टूबर - रत्न चंद 'रत्नेश' | कविता

रचनाकार: भारत-दर्शन संकलन | Collections
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लाल बहादुर, महात्मा गांधी
लेकर आए ऐसी आंधी
कायाकल्प हुआ देश का
जन-जन में चेतना जगा दी।

जन्में थे दोनों दो अक्टूबर
ये पुण्य आत्मा हमारे रहबर
देश-देश, कोने-कोने में
सुख शांति की जोत जला दी।

कोई भी जाति कोई धर्म हो
राग-द्वेश नहीं, एक-सा मर्म हो
मिल-जुल कर रहना सिखलाया
अखंडता की सुगंध फैला दी।

शास्त्री जी का नारा महान
जय जवान, जय किसान
सत्य अहिंसा के बल पर
गांधीजी ने धाक जमा दी।

- रत्न चंद 'रत्नेश'

 

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