वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

बादल | बाल गीत  (बाल-साहित्य )

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Author: क्षेत्रपाल शर्मा

बादल भैया, जल बरसा जा
सूरज, मत ढक, नीचे आजा॥ 

धरती पर हरियाली होगी,
रंग-बिरंगे फूल लगा जा॥ 

इन फूलों पर तितली नाचें,
होगा अपना खेल जरा सा॥ 

इतनी दूर तुम्हारा घर है,
और हवा की सैर सवारी॥ 

अगली बार मेरे घर आना,
तारे,चंदा परियां लाना॥ 

-क्षेत्रपाल शर्मा
 मो. 7983654429
 ई-मेल: kpsharma05@gmail.com

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