समस्त आर्यावर्त या ठेठ हिंदुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिंदी या हिंदुस्तानी है। -सर जार्ज ग्रियर्सन।

12वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन फिजी में (विविध)

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Author: भारत-दर्शन समाचार

12वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा फिजी सरकार के सहयोग से 15 से 17 फरवरी, 2023 तक नांदी (फिजी) में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन स्थल देनाराऊ आइलैंड कन्वेंशन सेंटर, नांदी, फिजी है। सम्मेलन स्थल पर हिंदी भाषा के विकास से संबंधित कई प्रदर्शनियाँ लगाई जाएंगी। सम्मेलन के दौरान शाम को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

दैनिक सम्मेलन-समाचार पत्र (सम्मेलन-समाचार), सम्मेलन-स्मारिका और शैक्षिक सत्रों में हुई चर्चाओं और सुझावों के आधार पर एक सम्मेलन रिपोर्ट भी प्रकाशित की जाएगी। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा “गगनांचल” का विशेष अंक निकाला जाएगा जो सम्मेलन को समर्पित होगा। परंपरा के अनुरूप सम्मेलन के दौरान भारत एवं अन्य देशों के हिंदी विद्वानों को हिंदी के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए “विश्व हिंदी सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन को फिजी में आयोजित करने का निर्णय मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में लिया गया था।

अधिक जानकारी के लिए विश्व हिन्दी सम्मेलन की वेब साइट ( https://vishwahindisammelan.gov.in) देखें।

पृष्ठ भूमि

पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 1975 में नागपुर, भारत में आयोजित किया गया था। तब से, विश्व के अलग-अलग भागों में, ऐसे 11 सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है। अभी तक पूर्व में आयोजित 11 सम्मेलनों के ब्यौरे इस प्रकार हैं:

विश्व हिंदी सम्मेलन की संकल्पना राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा 1973 में की गई थी। संकल्पना के परिणाम स्वरूप, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के तत्वावधान में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10-12 जनवरी 1975 को नागपुर, भारत में आयोजित किया गया था।

सम्मेलन का उद्देश्य इस विषय पर विचार विमर्श करना था कि तत्कालीन वैश्विक परिस्थिति में हिंदी को किस प्रकार सेवा का साधन बनाया जाए। 'महात्मा गाँधी जी की सेवा भावना से अनुप्राणित हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रवेश पाकर विश्व भाषा के रूप में समस्त मानव जाति की सेवा की ओर अग्रसर हो। साथ ही यह किस प्रकार भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम' विश्व के समक्ष प्रस्तुत करके 'एक विश्व, एक मानव परिवार' की भावना का संचार हो।'

सम्मेलन के आयोजकों को विनोबा भावे जी का आशीर्वाद तथा केंद्र सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात आदि राज्य सरकारों का समर्थन प्राप्त हुआ। नागपुर विश्वविद्यालय के प्रांगण में 'विश्व हिंदी नगर' का निर्माण किया गया। तुलसी, मीरा, सूर, कबीर, नामदेव और रैदास के नाम से अनेक प्रवेश द्वार बनाए गए। प्रतिनिधियों और अतिथियों के आवास का नाम 'विश्व संगम', मित्र निकेतन' 'विद्या विहार' और 'पत्रकार निवास' रखा गया। भोजनालयों के नाम भी 'अन्नपूर्णा', 'आकाश गंगा' आदि रखे गए।

सम्मेलन में काका साहेब कालेलकर ने हिंदी भाषा के सेवा धर्म को रेखांकित करते हुए कहा कि 'हम सबका धर्म सेवा धर्म है और हिंदी इस सेवा का माध्यम है..... हमने हिंदी के माध्यम से आज़ादी से पहले और आज़ाद होने के बाद भी समूचे राष्ट्र की सेवा की है और अब इसी हिंदी के माध्यम से विश्व की, सारी मानवता की सेवा करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।'

हिंदी को भावनात्मक धरातल से उठाकर ठोस एवं व्यापक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से और यह रेखांकित करने के उद्देश्य से कि हिंदी केवल साहित्य की हीभाषा नहीं बल्कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को अंगीकार करके अग्रसर होने में एक सक्षम भाषा है, विश्व हिंदी सम्मेलनों की संकल्पना की गई।

एक अन्य उद्देश्य हिन्दी को व्यापकता प्रदान करना था न कि केवल भावनात्मक स्तर तक सीमित करना। इस संकल्पना को 1975 में नागपुर में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में मूर्तरूप प्रदान किया गया।

अभी तक भारत और मॉरीशस विश्व हिंदी सम्मेलन को तीन-तीन बार आयोजित कर चुके हैं। निम्न तालिका में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई गई है:

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन (10-12 जनवरी, 1975), भारत
द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन(28-30 अगस्त, 1976), मॉरीशस
तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन (28-30 अक्टूबर, 1983), भारत
चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन (02-04 दिसम्बर, 1993), मॉरीशस
पांचवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (04-08 अप्रैल, 1996), ट्रिनिडाड एवं टोबेगो
छठा विश्व हिंदी सम्मेलन (14-18 सितंबर, 1999), यू. के.
सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (06-09 जून, 2003), सूरीनाम
आठवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (13-15 जुलाई, 2007), अमरीका,
नौवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (22-24 सितंबर, 2012), दक्षिण अफ्रीका
दसवां विश्व हिंदी सम्मेलन (10-12 सितंबर, 2015) भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत
ग्यारहवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (18-20 अगस्त, 2018) मॉरीशस
बारहवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (15 से 17 फरवरी, 2023) तक नांदी, फीजी

[भारत-दर्शन समाचार]

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