हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

क्यों निस दिन... | हिंदी ग़ज़ल (काव्य)

Print this

Author: अलताफ़ मशहदी

क्यों निस दिन आँख बरसती है,
नागिन सी मन को डसती है !

मन हौले हौले रोता है,
जब दुनिया मुझ पर हँसती है !

बसते हैं आँखों में आँसू,
मन आशाओं की बस्ती है !

जाँ देकर उनकी याद मिली,
इन दामों कितनी सस्ती है !

पी छिपकर बैठे हैं मन में,
दर्शन को आँख तरसती है !

दुनिया अलताफ़ जवानी है,
फुलवारी धन कर हँसती हैं !

-अलताफ़ मशहदी

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश