भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

मुआवज़ा (कथा-कहानी)

Print this

Author: सुनील कुमार शर्मा

".... मेरा सारा सामान, भारी बरसात में गिरी छत के नीचे दब गया है.... मुआवज़ा कब मिलेगा?" रमिया किरायेदारनी ने वार्ड के पार्षद से पूछा।

“जी आपको मुआवज़ा नहीं मिल सकता।" पार्षद लापरवाही से बोला 

“क्यों?” रमिया ने घबराकर पूछा।

“मुआवज़ा गरीबों के गिरे हुए मकानों का आया है, बर्बाद हुए सामान का नहीं।" पार्षद ने उसे समझाया।

“गरीबो के पास मकान होते ही कहाँ है?" रमिया गुस्से से पैर पटकती हुई, उठकर चल दी।

-सुनील कुमार शर्मा
 ईमेल:  sharmasunilkumar727@gmail.com

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें