हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
राजा-रानी
एक थे राजा, एक थी रानी
दोनों करते थे मनमानी
राजा का तो पेट बड़ा था
रानी का भी पेट घड़ा था
खूब वे खाते छक-छककर
फिर सो जाते थक-थककर
काम यही था बक-बक, बक-बक,
नौकर से बस झक-झक, झक-झक।
- जयप्रकाश भारती
[हिंदी के सर्वश्रेष्ठ बालगीत, १९८७, पराग प्रकाशन, दिल्ली]
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