वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'।
भैया-बहना | बाल कविता
समय से सोता राजू भैया
समय से सोती मिनी बहेना
समय से ही दोनों उठ जाते
झट पट हो तैयार हैं जाते
फिर वे जल्दी नाश्ता खाते
जिससे वे हैं पोषण पाते
फिर वे दोनों स्कूल हैं जाते
वहां बहुत सी शिक्षा पाते
स्कूल से वापस घर हैं आते
खाना खाकर खेलने जाते
- अमिश भट्ट
ई-मेल: amishbhat04@gmail.com
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