है उषा की पुणय-वेला
वीर-जीवन एक मेला
चल पड़ी है वीर युवकों, की नवल यह आज टोली?
आज कैसी वीर, होली?
मातृ-बन्धन काटने को
ध्येय पावन छाँटने को
बाँटने को शत्रु-संगर में, अनोखी लाल रोली !
आज कैसी वीर होली?
जा रहे हैं क्यों सुभट ये
और भोले निष्कपट से
आज करने प्रियतमा से, जेल में निज प्रेम-होली!
आज कैसी वीर होली?
- क्षेमचन्द्र 'सुमन', १६ मई' ४३
[ साभार: बन्दी के गान ]
मुस्लिम शासन में हिंदी फारसी के साथ-साथ चलती रही पर कंपनी सरकार ने एक ओर फारसी पर हाथ साफ किया तो दूसरी ओर हिंदी पर। - चंद्रबली पांडेय।
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)