राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Hindi Poems & Poetry - हिंदी कविता संकलन


Hindi Poems & Poetry - हिंदी कविता संकलन
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  1. बीरबल का सवैया

    अकबर के नवरत्नों में बीरबल सर्वाधिक प्रसिद्ध रहे हैं।  वे लिखते भी थे, उन्हीं  का एक सवैया। 

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  2. सन्नाटा

    सन्नाटा - भवानी प्रसाद मिश्र की कविता। Hindi Poem by Bhawani Prasad Mishra.

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  3. प्रदूषण

    प्रदूषण - बासुदेव अग्रवाल नमन की कविता। Hindi poem by Basudeo Agrawal Naman.

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  4. प्राण रहते

    प्राण रहते - भवानी प्रसाद मिश्र की गांधी पंचशती से एक सशक्त रचना।

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  5. देखो, सोचो, समझो

    देखो, सोचो, समझो - भगवतीचरण वर्मा की कविता। Dekho, Socho, Samjho - Hindi poem by Bhagwati Charan Verma (30 August 1903 – 5 October 1981), was one of t…

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  6. कलयुग के ब्रह्म-ऋषि

    कलयुग के ब्रह्म-ऋषि : बालेश्वर लिखी यह कविता बी एल गौड़ ने लिखी थी। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद् के भूतपूर्व उपाध्यक्ष, बी एल गौड़ की यह कविता स्व ब…

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  7. नया सबेरा

    नया सबेरा - बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष की नए वर्ष पर कविता. A Hindi poem by Brajendra Srivastava Utkarsh.

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  8. अँग्रेज़ी प्राणन से प्यारी।

    हिंदी-दिवस पर बरसाने लाल चतुर्वेदी की कविता, 'अँग्रेज़ी'। भारतीयों के अँग्रेज़ी प्रेम को इंगित करती यह व्यंगिका। सचमुच हम भारतीयों का अँग्रेज़ी प्रेम …

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  9. कवि

    कवि - भवानी प्रसाद मिश्र की कविता | Kavi - Poem by Bhawani Prasad Mishra

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  10. आओ ! आओ ! भारतवासी ।

    आओ ! आओ ! भारतवासी । प्रथम हिन्दी साहित्य सम्मेलन 10 अक्टूबर 1910 को बाबू जगन्नाथ बी० ए० द्वारा लिखा गया गीत जो सम्मेलन में स्कूल के विद्यार्थियों न…

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  11. भारतेन्दु की मुकरियां

    खुसरो की मुकरियां (क्यौं सखि सज्जन ना सखि पंखा) प्रसिद्ध हैं, उस समय इसी प्रकार की मुकरियां चलती थीं लेकिन हरिश्चन्द्र ने उपरोक्त 'नए जमाने की मुकरिया…

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  12. जाहिल मेरे बाने

    जाहिल मेरे बाने- भवानी प्रसाद मिश्र की कविता - जाहिल मेरे बाने। Jahil Mere Baane- Hindi poem by Bhawani Prasad Mishra.

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  13. गीत फ़रोश

    Geet Farosh- Bhawani Prasad Mishra. भवानी प्रसाद मिश्र की कविता - गीत फ़रोश.

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  14. मातृभाषा प्रेम पर भारतेंदु के दोहे

    निज भाषा उन्नति अहै - भारतेंदु हरिश्चंद्र का हिन्दी काव्य। मातृभाषा प्रेम पर दोहे। निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल/बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत …

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