मेरा दिल वह दिल है | ग़ज़ल
चुप क्यों न रहूँ - त्रिलोचन की ग़ज़ल। मेरा दिल वह दिल है कि हारा नहीं है/कहीं तिनके का भी सहारा नहीं है/जो मोजों को देखा तो जी हो न माना/यह मालूम था य…
कविता पढ़ेंचुप क्यों न रहूँ - त्रिलोचन की ग़ज़ल। मेरा दिल वह दिल है कि हारा नहीं है/कहीं तिनके का भी सहारा नहीं है/जो मोजों को देखा तो जी हो न माना/यह मालूम था य…
कविता पढ़ेंचुप क्यों न रहूँ - त्रिलोचन की ग़ज़ल। Ghazal by Trilochan.
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कविता पढ़ेंफिर तेरी याद- त्रिलोचन की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Trilochan.
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