भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

यशपाल | Yashpal साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 6

यशपाल | Yashpal

दुःख

जिसे मनुष्य सर्वापेक्षा अपना समझ भरोसा करता है, जब उसी से अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो, मन वितृष्णा से भर जाता है; एकदम मर जाने की इच्छा होने लगती है; इसे श?...
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करवा का व्रत

कन्हैयालाल अपने दफ्तर के हमजोलियों और मित्रों से दो तीन बरस बड़ा ही था, परन्तु ब्याह उसका उन लोगों के बाद हुआ। उसके बहुत अनुरोध करने पर भी साहब ने उसे ब्य?...
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दुःख का अधिकार | यशपाल की कहानी

मनुष्यों की पोशाकें उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती हैं। प्रायः पोशाक ही समाज में मनुष्य का अधिकार और उसका दर्जा निश्चित करती है। वह हमारे लिए अ?...
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होली का मज़ाक | यशपाल की कहानी

'बीबी जी, आप आवेंगी कि हम चाय बना दें!'' किलसिया ने ऊपर की मंज़िल की रसोई से पुकारा।
''नहीं, तू पानी तैयार कर- तीनों सेट मेज़ पर लगा दे, मैं आ रही हूँ। बाज़ आए तेर?...
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परदा | कहानी

चौधरी पीरबख्श के दादा चुंगी के महकमे में दारोगा थे । आमदनी अच्छी थी । एक छोटा, पर पक्का मकान भी उन्होंने बनवा लिया । लड़कों को पूरी तालीम दी । दोनों लड़के ए...
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महाराजा का इलाज

उत्तर-प्रदेश की जागीरों और रियासतों में मोहाना की रियासत का बहुत नाम था । रियासत की प्रतिष्ठा के अनुरूप ही महाराजा साहब मोहाना की बीमारी की भी प्रसिद्धि...
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यशपाल | Yashpal का जीवन परिचय (Biography)

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