भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है। - टी. माधवराव।

वृन्द साहित्य Hindi Literature Collections

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वृन्द

वृन्द के नीति-दोहे

स्वारथ के सब ही सगे, बिन स्वारथ कोउ नाहिं ।
जैसे पंछी सरस तरु, निरस भये उड़ि जाहिं ।। १ ।।
मान होत है गुनन तें, गुन बिन मान न होइ ।
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कवि वृन्द के दोहे 

जाही ते कछु पाइये, करिये ताकी आस। 
रीते सरवर पर गये, कैसे बुझत पियास॥ 
दीबो अवसर को भलो, जासों सुधेरै काम। 
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वृन्द का जीवन परिचय (Biography)

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