अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

विश्‍वंभरनाथ शर्मा कौशिक साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

विश्‍वंभरनाथ शर्मा कौशिक

ताई | कहानी

''ताऊजी, हमें लेलगाड़ी (रेलगाड़ी) ला दोगे?" कहता हुआ एक पंचवर्षीय बालक बाबू रामजीदास की ओर दौड़ा।
बाबू साहब ने दोंनो बाँहें फैलाकर कहा- ''हाँ बेटा,ला देंगे।'' ?...
पूरा पढ़ें...

पत्रकार

दोपहर का समय था । 'लाउड स्पीकर' नामक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र के दफ्तर में काफी चहल-पहल थी। यह एक प्रमुख तथा लोकप्रिय पत्र था।
प्रधान सम्पादक अपने कमरे ?...
पूरा पढ़ें...
विश्‍वंभरनाथ शर्मा कौशिक का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।