भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा | फीजी व न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections

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महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा | फीजी व न्यूज़ीलैंड

उज्ज्वल भविष्य

धनई और कन्हई लंगोटिया यार थे और पड़ोसी भी। ऐसा लगता था कि उनके दो शरीर थे परन्तु आत्मा एक ही थी। वे प्रण बांध कर हर दिन कम से कम चार घण्टे एक साथ बिताते थे। आ...
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महेन्द्र चन्द्र विनोद शर्मा | फीजी व न्यूज़ीलैंड का जीवन परिचय (Biography)

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