अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

विनोदशंकर व्यास साहित्य Hindi Literature Collections

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विनोदशंकर व्यास

विधाता

चीनी के खिलौने, पैसे में दो; खेल लो, खिला लो, टूट जाए तो खा लो--पैसे में दो।
सुरीली आवाज में यह कहता हुआ खिलौनेवाला एक छोटी-सी घंटी बजा रहा था।
उसको आवाज सुनते ...
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विनोदशंकर व्यास का जीवन परिचय (Biography)

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