हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

विजय कुमार सिंह | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

विजय कुमार सिंह | ऑस्ट्रेलिया

इक अनजाने देश में

इक अनजाने देश में जब भी, मैं चुप हो रह जाता हूँ,
अपना मन उल्लास से भरने, देश तुझे ही गाता हूँ|
शुभ्र हिमालय सर हो मेरा,
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आ जा सुर में सुर मिला

आ जा सुर में सुर मिला ले, यह मेरा ही गीत है,
एक मन एक प्राण बन जा, तू मेरा मनमीत है।
सुर में सुर मिल जाए इतना, सुर अकेला न रहे,
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विजय कुमार सिंह | ऑस्ट्रेलिया का जीवन परिचय (Biography)

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