अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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वाचस्पति पाठक

अभिभावक 

अभिभावक - वाचस्पति पाठक की कहानी
अपरिचित देश के इस नवीन वासस्थान में शरद् ऋतु का मध्यान्ह; मेरे हृदय के अनिश्चित विषाद सा शून्य था। जिसे संसार में कोई काम...
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वाचस्पति पाठक का जीवन परिचय (Biography)

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