भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

स्वदेश दीपक साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 1

स्वदेश दीपक

तमाशा

वह अधेड़ उम्र का आदमी बड़ी देर से किसी साएदार पेड़ की तलाश कर रहा है। उसका आठ साल का लड़का बड़े थके-थके कदमों से बाप के पीछे चल रहा है। उसके गले में एक छोटा-स...
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स्वदेश दीपक का जीवन परिचय (Biography)

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