भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant

जीवन का अधिकार

जो है समर्थ, जो शक्तिमान,
जीवन का है अधिकार उसे।
उसकी लाठी का बैल विश्‍व,
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सुख-दुख | कविता

मैं नहीं चाहता चिर-सुख,
मैं नहीं चाहता चिर-दुख,
सुख दुख की खेल मिचौनी
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स्वप्न बंधन

बाँध लिया तुमने प्राणों को फूलों के बंधन में
एक मधुर जीवित आभा सी लिपट गई तुम मन में!
बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में!
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बाँध दिए क्यों प्राण

सुमित्रानंदन पंत की हस्तलिपि में उनकी कविता, 'बाँध दिए क्यों प्राण'
 
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सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant का जीवन परिचय (Biography)

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