सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 5
जीवन का अधिकार
जो है समर्थ, जो शक्तिमान,
जीवन का है अधिकार उसे।
उसकी लाठी का बैल विश्व,
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जीवन का है अधिकार उसे।
उसकी लाठी का बैल विश्व,
स्वप्न बंधन
बाँध लिया तुमने प्राणों को फूलों के बंधन में
एक मधुर जीवित आभा सी लिपट गई तुम मन में!
बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में!
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एक मधुर जीवित आभा सी लिपट गई तुम मन में!
बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में!
बाँध दिए क्यों प्राण
सुमित्रानंदन पंत की हस्तलिपि में उनकी कविता, 'बाँध दिए क्यों प्राण'
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