अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant

जीवन का अधिकार

जो है समर्थ, जो शक्तिमान,
जीवन का है अधिकार उसे।
उसकी लाठी का बैल विश्‍व,
पूरा पढ़ें...


सुख-दुख | कविता

मैं नहीं चाहता चिर-सुख,
मैं नहीं चाहता चिर-दुख,
सुख दुख की खेल मिचौनी
पूरा पढ़ें...

स्वप्न बंधन

बाँध लिया तुमने प्राणों को फूलों के बंधन में
एक मधुर जीवित आभा सी लिपट गई तुम मन में!
बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में!
पूरा पढ़ें...

बाँध दिए क्यों प्राण

सुमित्रानंदन पंत की हस्तलिपि में उनकी कविता, 'बाँध दिए क्यों प्राण'
 
#
पूरा पढ़ें...
सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।