भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सियाराम शरण गुप्त | Siyaram Sharan Gupt साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

सियाराम शरण गुप्त | Siyaram Sharan Gupt

मैं तो वही खिलौना लूँगा

'मैं तो वही खिलौना लूँगा'
मचल गया दीना का लाल -
'खेल रहा था जिसको लेकर
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एक फूल की चाह

उद्वेलित कर अश्रु-राशियाँ,
हृदय-चिताएँ धधकाकर,
महा महामारी प्रचण्ड हो
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शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी 

'काफ़िर है, काफ़िर है, मारो!' 
उत्तेजित जन चिल्लाये; 
विद्यार्थी जी बिना झिझक के 
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सुजीवन

हे जीवन स्वामी तुम हमको
जल सा उज्ज्वल जीवन दो!
हमें सदा जल के समान ही
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काकी

उस दिन बड़े सवेरे श्यामू की नींद खुली तो उसने देखा घर भर में कुहराम मचा हुआ है। उसकी माँ नीचे से ऊपर तक एक कपड़ा ओढ़े हुए कम्बल पर भूमि-शयन कर रही है और घर के...
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सियाराम शरण गुप्त | Siyaram Sharan Gupt का जीवन परिचय (Biography)

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