सियाराम शरण गुप्त | Siyaram Sharan Gupt साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 5
मैं तो वही खिलौना लूँगा
'मैं तो वही खिलौना लूँगा'
मचल गया दीना का लाल -
'खेल रहा था जिसको लेकर
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मचल गया दीना का लाल -
'खेल रहा था जिसको लेकर
शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी
'काफ़िर है, काफ़िर है, मारो!'
उत्तेजित जन चिल्लाये;
विद्यार्थी जी बिना झिझक के
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उत्तेजित जन चिल्लाये;
विद्यार्थी जी बिना झिझक के
काकी
उस दिन बड़े सवेरे श्यामू की नींद खुली तो उसने देखा घर भर में कुहराम मचा हुआ है। उसकी माँ नीचे से ऊपर तक एक कपड़ा ओढ़े हुए कम्बल पर भूमि-शयन कर रही है और घर के...
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