भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

शारदा मोंगा | न्यूजीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

शारदा मोंगा | न्यूजीलैंड

ग्रामवासिनी

भारत माता ग्रामवासिनी,
शस्य श्यामला सुखद सुहासिनी,
हिम-किरीट सुशोभित भाल है,
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भूमण्डलीय तापक्रम वृद्धि

प्रश्न चिन्ह? खतरा अत्यधिक,
जलप्रदूषण के खतरों से,
जीव जगत को बचावो,
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मैं तटनी तरल तरंगा, मीठे जल की निर्मल गंगा

मैं तटनी तरल तरंगा
मीठे जल की निर्मल गंगा
पर्वत की मैं बिटिया
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रात भर का वह गहरा अँधेरा

रात भर का वह गहरा अँधेरा,
गहन अवसाद था बहुतेरा,
रजनी चुपचाप अश्रु बहाती,
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शारदा मोंगा | न्यूजीलैंड का जीवन परिचय (Biography)

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