भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

सफेद गुड़

दुकान पर सफेद गुड़ रखा था। दुर्लभ था। उसे देखकर बार-बार उसके मुँह से पानी आ जाता था। आते-जाते वह ललचाई नजरों से गुड़ की ओर देखता, फिर मन मसोसकर रह जाता।
आखि?...
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अजनबी देश है यह

अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है;
जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
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लीक पर वे चलें

लीक पर वे चलें जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं,
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जीवन परिचय (Biography)

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