संध्या नायर | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 10
कलम इतनी घिसो, पुर तेज़--- | ग़ज़ल
कलम इतनी घिसो, पुर तेज़, उस पर धार आ जाए
करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
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करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
मुहब्बत की जगह--- | ग़ज़ल
मुहब्बत की जगह, जुमला चला कर देख लेते हैं
ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है
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ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है
कलम इतनी घिसो... | ग़ज़ल
कलम इतनी घिसो, पुर तेज़, उस पर धार आ जाए
करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
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करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
बड़े साहिब तबीयत के... | ग़ज़ल
बड़े साहिब तबीयत के ज़रा नासाज़ बैठे हैं
हमे डर है गरीबों से तनिक नाराज़ बैठे हैं
महल के गेट पर, सोने की तख्ती पर लिखाया है
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हमे डर है गरीबों से तनिक नाराज़ बैठे हैं
महल के गेट पर, सोने की तख्ती पर लिखाया है
खयालों की जमीं पर... | ग़ज़ल
खयालों की जमीं पर मैं हकीकत बो के देखूंगी
कि तुम कैसे हो, ये तो मैं ,तुम्हारी हो के देखूंगी
तुम्हारे दिल सरीखा और भी कुछ है, सुना मैंने
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कि तुम कैसे हो, ये तो मैं ,तुम्हारी हो के देखूंगी
तुम्हारे दिल सरीखा और भी कुछ है, सुना मैंने
चांद कुछ देर जो ... | ग़ज़ल
चांद कुछ देर जो खिड़की पे अटक जाता है
मेरे कमरे में गया दौर ठिठक जाता है
चांदनी सेज पर मखमल सी बिछा जाती है
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मेरे कमरे में गया दौर ठिठक जाता है
चांदनी सेज पर मखमल सी बिछा जाती है
कोई बारिश पड़े ऐसी... | ग़ज़ल
कोई बारिश पड़े ऐसी, जो रिसते घाव धो जाए
भले आराम कम आए, ज़रा सा दर्द तो जाए
बहुत चाहा कभी मैंने, मेरी मर्ज़ी चले थोड़ी
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भले आराम कम आए, ज़रा सा दर्द तो जाए
बहुत चाहा कभी मैंने, मेरी मर्ज़ी चले थोड़ी
बात छोटी थी... | ग़ज़ल
बात छोटी थी, मगर हम अड़ गए
सच कहें, लेने के देने पड़ गए
फूल थे, समझे कि हमसे बाग है
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सच कहें, लेने के देने पड़ गए
फूल थे, समझे कि हमसे बाग है
मुहब्बत की जगह | ग़ज़ल
मुहब्बत की जगह, जुमला चला कर देख लेते हैं
ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है
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ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है