भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

संध्या नायर | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 10

संध्या नायर | ऑस्ट्रेलिया

शिव की भूख

एक बार शिव शम्भू को
लगी ज़ोर की भूख
भीषण तप से गया
पूरा पढ़ें...

कलम इतनी घिसो, पुर तेज़--- | ग़ज़ल

कलम इतनी घिसो, पुर तेज़, उस पर धार आ जाए
करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
पूरा पढ़ें...

मुहब्बत की जगह--- | ग़ज़ल

मुहब्बत की जगह, जुमला चला कर देख लेते हैं
ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है
पूरा पढ़ें...

कलम इतनी घिसो... | ग़ज़ल

कलम इतनी घिसो, पुर तेज़, उस पर धार आ जाए
करो हमला, कि शायद होश में, सरकार आ जाए
खबर माना नहीं अच्छी, मगर इसमें बुरा क्या है
पूरा पढ़ें...

बड़े साहिब तबीयत के... | ग़ज़ल

बड़े साहिब तबीयत के ज़रा नासाज़ बैठे हैं
हमे डर है गरीबों से तनिक नाराज़ बैठे हैं
महल के गेट पर, सोने की तख्ती पर लिखाया है
पूरा पढ़ें...

खयालों की जमीं पर... | ग़ज़ल

खयालों की जमीं पर मैं हकीकत बो के देखूंगी
कि तुम कैसे हो, ये तो मैं ,तुम्हारी हो के देखूंगी
तुम्हारे दिल सरीखा और भी कुछ है, सुना मैंने
पूरा पढ़ें...

चांद कुछ देर जो ... | ग़ज़ल

चांद कुछ देर जो खिड़की पे अटक जाता है
मेरे कमरे में गया दौर ठिठक जाता है
चांदनी सेज पर मखमल सी बिछा जाती है
पूरा पढ़ें...

कोई बारिश पड़े ऐसी... | ग़ज़ल

कोई बारिश पड़े ऐसी, जो रिसते घाव धो जाए
भले आराम कम आए, ज़रा सा दर्द तो जाए
बहुत चाहा कभी मैंने, मेरी मर्ज़ी चले थोड़ी
पूरा पढ़ें...

बात छोटी थी... | ग़ज़ल

बात छोटी थी, मगर हम अड़ गए
सच कहें, लेने के देने पड़ गए
फूल थे, समझे कि हमसे बाग है
पूरा पढ़ें...

मुहब्बत की जगह | ग़ज़ल

मुहब्बत की जगह, जुमला चला कर देख लेते हैं
ज़माने के लिए, रिश्ता चला कर देख लेते हैं
खरा हो या कि हो खोटा, खनक तो एक जैसी है
पूरा पढ़ें...
संध्या नायर | ऑस्ट्रेलिया का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।