संत पलटूदास साहित्य Hindi Literature Collections
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गुरु महिमा
संत पलटूदास गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए कहते हैं:
आपै आपको जानते, आपै का सब खेल।
पलटू सतगुरु के बिना, ब्रह्म से होय न मेल॥
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आपै आपको जानते, आपै का सब खेल।
पलटू सतगुरु के बिना, ब्रह्म से होय न मेल॥