भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

ऋषभदेव शर्मा साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

ऋषभदेव शर्मा

नाग की बाँबी खुली है आइए साहब

नाग की बाँबी खुली है आइए साहब
भर कटोरा दूध का भी लाइए साहब
रोटियों की फ़िक्र क्या है? कुर्सियों से लो
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धुंध है घर में उजाला लाइए

धुंध है घर में उजाला लाइए
रोशनी का इक दुशाला लाइए
केचुओं की भीड़ आँगन में बढ़ी
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हैं चुनाव नजदीक सुनो भइ साधो

हैं चुनाव नजदीक, सुनो भइ साधो
नेता माँगें भीख, सुनो भइ साधो
गंगाजल का पात्र, आज सिर धारें
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ऋषभदेव शर्मा का जीवन परिचय (Biography)

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