हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

रामनरेश त्रिपाठी साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

रामनरेश त्रिपाठी

रामनरेश त्रिपाठी के नीति के दोहे

विद्या, साहस, धैर्य, बल, पटुता और चरित्र।
बुद्धिमान के ये छवौ, है स्वाभाविक मित्र ।।
नारिकेल सम हैं सुजन, अंतर, दयानिधान ।
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अन्वेषण

मैं ढूंढता तुझे था, जब कुंज और वन में।
तू खोजता मुझे था, तब दीन के सदन में॥
तू 'आह' बन किसी की, मुझको पुकारता था।
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पूत पूत, चुप चुप

मेरे मकान के पिछवाड़े एक झुरमुट में महोख नाम के पक्षी का एक जोड़ा रहता हैं । महोख की आँखें तेज़ रोशनी को नहीं सह सकतीं, इससे यह पक्षी ज्यादातर रात में और शा...
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चतुर चित्रकार

चित्रकार सुनसान जगह में बना रहा था चित्र।
इतने ही में वहाँ आ गया यम राजा का मित्र॥
उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गये होश।
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रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय (Biography)

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